कलम-पथ

शब्द जिन्दगी के_____यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी

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yatindranathchaturvedi


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गंगा की बात

Posted On: 26 Apr, 2016  
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‘काशी’ अब करवट बदल रही

Posted On: 3 Apr, 2016  
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सकते में ‘जय हिन्द’!

Posted On: 13 Mar, 2016  
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Celebrity Writer Religious पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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काशी में अघोषित आपातकाल

Posted On: 29 Nov, 2015  
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मैं खामोश बनारस हूँ

Posted On: 24 Nov, 2015  
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काशी का काला दिन और काली रात

Posted On: 7 Nov, 2015  
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मैं हिन्दी हूँ

Posted On: 1 Sep, 2015  
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Celebrity Writer Hindi Sahitya social issues में

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आरक्षण एक नासूर

Posted On: 26 Aug, 2015  
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Celebrity Writer social issues न्यूज़ बर्थ में

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काश! फिर जन्म लेते पंडित कमलापति त्रिपाठी

Posted On: 25 Aug, 2015  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

के द्वारा: rafe rafe

रेल के डिब्बों में चाय के प्यालों में, केतली की गर्माहट में, मुसाफिरों की शेख चिल्ली में, पान की खिल्ली में, गलियों की गिल्ली में, आज भी मैं ब्याप्त हूँ .. पर न जाने क्यों अभिशप्त हूँ अभिजात्य में, न्यायपालिका में, शोध में, वायुयान में, अंतरिक्ष के ज्ञान में ... साल में एक बार मैं आती हूँ, उन्हीं लोगों के होठों पर, स्वर्णिम झरोखों पर, संचार पटल पर, फि सब सो जाते हैं, खो जाते हैं, अपने ही ड्रीम में, तेल और क्रीम में ...यही है ब्यथा मेरी , पुरानी कथा मेरी ..कुछ तो मेरे प्रेमी है, सच्चे देश प्रेमी हैं, उनके ही बूते मैं आज भी जिन्दी हूँ हाँ मैं हिंदी हूँ बहुत बहुत बधाई आदरणीय यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी जी, आपने हिंदी को जागरण पर याद किया और जागरण ने आपको ...हम सब साथ साथ हैं आज भी और कल भी. कुछ पंक्तियाँ मैंने जोड़ी है अपना समझकर! सादर !

के द्वारा: jlsingh jlsingh

जहां लोगों के पास रहने को घर क्या एक पूरा कमरा नहीं है और एक तरफ एक पूर्व अय्यास प्रधानमंत्री ने मरने के बाद भी तीस एकड़ में फैला हुआ बंगला नहीं छोड़ा ( त्रिमूर्ति भवन) और कोंग्रेश तो आज भी कई बंगले दिल्ली में कब्जा किये हुए है..... उनका क्या ....? कपडे और बाकी चीजें तो रहने ही दीजिये ! जिनकी चड्डी भी मोदी के सूट से महंगी आती होंगी ऐसे नेताओं से भरी पड़ी है कांग्रेस ! चमचागिरी ठीक है लेकिन बिना अकल वाले लोग भी आजकल लेखक बन गए हैं .......! १९४७ में भी भारत गरीब था और सचाई ये है की नेहरू के एक टाइम के खाने का खर्च १३००० से १४००० के बीच था आज कल के २००००० से २५०००० रूपए के बराबर ! अँधा होना ज्यादा ठीक है ऐसे मानसिक गुलामी के पीड़ित लोगों के लिए !

के द्वारा: dhirchauhan72 dhirchauhan72

चतुर्वेदी जी,नमस्कार. आप ने सशक्त रूप में कांग्रेस को प्रस्तुत किया है.लेकिन जनता में पुनः विश्वास पैदा करना होगा.राहुल गांधी को भी अपने चिंतन और संवाद प्रक्रिया का मंथन करना होगा.जमीन और उससे जुड़े कार्यकर्ताओं को उचित सम्मान देना होगा ,अपनी उपलब्धियों को समय रहते जोरदार ढंग से न प्रस्तुत कर पाने के कारण तथा अपने एवं सहयोगी दलों के मंत्रियों के बदजुबानी एवं भ्रष्टाचार के मामले हाबी हो जाने के कारण ही पराजित होना पड़ा.अब भी समय है.आगामी विधान सभाओं के चुनाव के पहले सोच,व्यवहार और प्रस्तुतीकरण में भारी परिवर्तन लाना होगा.नेता को एक ओजस्वी वक्ता भी होना चाहिए,इंदिरा जी और हेमवती नंदन बहुगुणा की तरह,न कि मनमोहन सिंह जी की तरह.

के द्वारा: OM DIKSHIT OM DIKSHIT

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

सर्वप्रथम "ब्लागर ऑफ दा वीक" होने पर बहुत बहुत बधाई| बहुत ही सारगर्भित लेख लिखने के लिए एक बार फिर से बधाई| इन लेखों के माध्यम से शायद धर्म और समाज के उन तथाकथित ठेकेदारों तक ये सन्देश पहुँच सके कि आम लोग क्या सोचते व् क्या चाहते हैं वरना उनको तो धार्मिक भावनाओं को भड़का कर अपनी रोटियां सेकना बखूबी आता है| हम लोगों को समझना ही होगा कि राम किसी कि निजी संपत्ति नहीं हैं न ही धर्म कोई व्यापार या राजनीती है धर्म तो जीवन जीने का एक आवश्यक तत्व है जिसके बिना संसार में अराजकता और अन्धकार ही होगा जीवन नहीं| कुछ लोग राम के नाम को अपने हाथ कि कठपुतली बना कर इस कदर घसीट रहे हैं कि उनकी मर्यादा एवं त्याग की छवि को ही मिटा कर रख दिया है| भगवानदास मेहंदीरत्ता

के द्वारा: bhagwandassmendiratta bhagwandassmendiratta

आदरणीय यतीन्द्र नाथ जी, सादर अभिवादन और सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर के लिए हार्दिक बधाई! आपने एक सांस में सब कुछ कह डाला, अशोक सिंघल, परवीन तोगड़िया योगी आदित्यनाथ और साध्वी निरंजन ज्योति और भी बहुत सारे नाम हैं जो पूरे भरता के साथ पाकिस्तान और अफगानिस्तान को भी हिंदू बनाकर ही छोड़ेंगे... चलिए कहने में क्या हर्ज है. पर यही कारण है कि राज्य सभा में प्रधान मंत्री के सामने विपक्ष का हंगामा चलता रहा और प्रधान मंत्री खामोश बैठे रहे... विकास का नारा और वादा कहाँ चला गया ... अभी कुछ दिन और बीतने दीजिये मोदी जी के अपने ही इनकी जड़ खोदने में लगे हुए हैं.... पर हर हाल में नुक्सान तो आम आदमी का ही होता है न!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

आदरणीय यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी जी ! अच्छे लेख के लिए अभिनन्दन और बधाई ! बहुत सी चीजें पूरी मानव जाति के लिए होते हुए भी राष्ट्रिय महत्व और राष्ट्रिय धरोहर घोषित की जतिन हैं, उसका एक ही मकसद होता है कि उसे लम्बे समय तक के लिए सुरक्षित और महत्वपूर्ण बनाया जाये ! यदि हम किसी चीज को पहले महत्व नहीं देंगे तो दुनिया क्यों देगी ! यदि राष्ट्र, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राष्ट्रिय पक्षी और राष्ट्रिय धरोहर घोषित हो सकता है तो राष्ट्रिय ग्रन्थ क्यों नहीं घोषित हो सकता है ! प्रकृति कि बहुत सी चीजों जैसे-धरती, पानी, हवा, आकाश और अग्नि आदि भी सम्पूर्ण विश्व की धरोहर होते हुए भी किसी देश की राष्ट्रिय धरोहर भी होती हैं ! हम ये थोड़े ही कह रहे हैं कि गीता सिर्फ हमारी है, बल्कि उसे राष्ट्रिय ग्रन्थ का दर्जा देकर हम स्वयं उसे महत्व देते हुए सारे विश्व को महत्व देने के लिए प्रेरित करेंगे ! दरअसल यही मांग कांग्रेस ने कि होती तो सभी उसकी तारीफ करते ! भाजपा से एलर्जी होना ही विरोध का मुख्य कारण है !

के द्वारा: sadguruji sadguruji

भगवान का पंजीकरण नहीं हो सकता! भगवान की आकाश-वाणी का राष्ट्रीयकरण नहीं होता। सूर्य किस देश की राष्ट्रिय संपत्ति है! चन्द्रमा किसकी धरोहर है! धरती की चौहद्दी बाँट चुका इंसान जल बांध रहा हैं, अग्नि पर काबिज सभ्यता आकाश को नाथ, हवा पर आधिपत्य स्थापित कर लेने को आतुर है। अपौरुषेय कहे जाने वाले आरण्यक संस्कृति के वेद-उपनिषदों को राष्ट्रीय घोषति करना अपने भगवान को पंजीकृत करना है। मानवीय सभ्यता के धरोहर ग्रन्थ “श्रीमद्भगवद्‌गीता” को इंसानी सरहदों तक सीमित करना प्रकृति को बाँध देना है। भगवान श्री राम की मर्यादा राष्ट्रीय आचरण नहीं इंसानियत का समाजीकरण है। - आपने काफी शोध के साथ इस आलेख को प्रस्तुत किया है. संभवत: सुषमा स्वराज भी इतना नहीं जानती होंगी उन्हें कुछ कहना थाइसलिए कह दिया. कुछ बोलीं तो सही नहीं तो आजकल उनकी आवाज कहाँ सुनाई पड़ती है. एकोअहम (मोदी) केसिवा अब भाजपा में रक्खा क्या है......? अब आडवाणी जी को भी कुछ कहना था इसलिए गीता के साथ रामायण महाभारता को भी जोड़ दिया.....

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: yatindranathchaturvedi yatindranathchaturvedi

आदरणीय यतीन्द्र नाथ जी, सादर अभिवादन! आपने संत रामपाल की अच्छी मलामत की है. आशाराम ने भी कुछ ऐसा ही नाटक किया था. अबतक जेल में चक्की पीस रहे हैं. निर्मल बाबा फिर से प्रवचन देने लगे हैं....इस प्रकार विभिन्न बाबाओं की लीला अपरम्पार है. ये सभी हमारी धार्मिक आस्था का दोहन करते हैं. बातें बड़ी और कर्म निकृष्ट. ..आखिर गिरफ्तार हुए.. पर ६ मासूमों की जान लेकर, सैंकड़ों लोगों को लहूलुहान कर, दोष हम सबका है हम बिना परिश्रम या पुरुषार्थ किये इनके माया जाल में फंस जाते हैं. बहरहाल अपना कर्म करते रहना और समयानुसार भगवान को याद कर लेंना ...हो सके तो किसी की मदद कर देना यही सबसे बड़ा धर्म है मेरे हिशाब से...

के द्वारा: jlsingh jlsingh

के द्वारा: jlsingh jlsingh

श्रद्धेय ,..सादर प्रणाम आपके अनमोल विचारों के लिए हृदय से आभारी हूँ ,.... गलती का दंड न मिले तो गलती कैसी !...गलती करने का मजा तो दंड में ही है !......बहरहाल मैं मूरख यह स्वीकार नहीं करता कि उन्होंने गलती की है !...यदि हम गलती मानते ही हैं ,..तो उसके साथ अच्छाइयां भी देखनी चाहिए !.....स्वामीजी सदा समग्र मानवता का हित चाहते करते हैं ,..हम जैसे मूरख लोग उसे अनसमझा करते हैं ,.........वैसे भी कुछ गलतियां हो जाती हैं ,..कुछ गलतियां की जाती हैं ,.....कुछ अनजाने ही गलत लगता है ,....कुछ जानबूझकर गलत होता है !....अंततः सबका लक्ष्य सुधार ही होता है ,..सुधार की कोई सीमा नहीं होती !.....स्वामीजी इस घटना के बाद अवश्य ही और परिष्कृत हुए होंगे !.......एक दृष्टिकोण से कुछ गलत नहीं है !.....दुसरे से सबकुछ गलत ही है !..अंततः नियति जो चाहती है वही होता है ,..हरिइच्छा सर्वोपरि !... मसला मात्र हमारी दृष्टि का है !.........कुछ गलत कहा हो तो क्षमादान के साथ सुधार कीजियेगा ,....सादर आभार सहित !

के द्वारा: Santosh Kumar Santosh Kumar

आदरणीय सादर प्रणाम परिवर्तन प्रकृति का पक्का नियम है ,....ऋषि कणादि पिप्पलादि ने अलग काम किया ,...पतंजलि ने अलग काम किया ,...राजर्षि विश्वामित्र ने अलग काम किया ,..विदेह जनक अलग मिजाज से रहे ,....परशुराम ने अलग काम किया ,....वक्त की जरूरत के हिसाब से श्रेष्ठतम करना मानव समाज संत समाज की आदिम परम्परा है !.....हर समय कोई पूर्ण नहीं रहा ,...तमाम महापुरुष तो किसी समय कुत्सित नीच कर्म भी किये हैं ,.....आखिरकार भावना और अंतिम परिणाम ही सबकुछ होता है ! स्वामीजी के कुछ शब्द गैरजरूरी हो सकते हैं ,...उनमें कुछ कमी भी हो सकती है लेकिन अल्पतम कमी के लिए उनको नकारना या अपमानित करना निहायत गलत है !....आप निष्पक्ष सर्वांगीण तुलना करेंगे तो अवश्य ही सच महसूस कर पायेंगे !....सादर धन्यवाद सहित वन्देमातरम !

के द्वारा: Santosh Kumar Santosh Kumar

के द्वारा: yamunapathak yamunapathak

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के द्वारा: ANJALI ARORA ANJALI ARORA

के द्वारा: शालिनी कौशिक एडवोकेट शालिनी कौशिक एडवोकेट

के द्वारा: deepakbijnory deepakbijnory

जब चुनाव आता है तब जिनके हाँथ खून से सने होते है, वही आवाम का आंसू पोछने निकल पड़ते हैं। जबकि आवाम के आंसू पोडियम से नहीं, नजदीक आकर पोछे जाते है। जनता के जान-माल को दांव पर लगाकर राजनीति की फसल तैयार हो रही है। नफ़रत का जहर ईर्ष्या की आग में मुर्दों की फैक्ट्री बन कर काम कर रहा है। जातीय द्वेष, धार्मिक उन्माद, लाशों पर राजनीति जैसे संवेदनशील मसले में लाखों नागरिक मारे गए। आतंकवाद को कोई मजहब नहीं होता। लोकतंत्र में किसी को बांटा नहीं जाता। पर कुछ लोग बगैर थके, बिना रुके देश को बांटे चले आ रहे हैं। सियासत देश और देश कि जनता से बड़ी नहीं है। राजनीति दुश्मनी नहीं संवेदना की पथिक है। पर, संवेदनशील सवालों पर सनसनी भी एक नियति है।आपको बहुत बहुत बधाई,इस अच्छे लेख के लिए.

के द्वारा: sadguruji sadguruji

के द्वारा: Ritu Gupta Ritu Gupta

के द्वारा: DR. SHIKHA KAUSHIK DR. SHIKHA KAUSHIK

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के द्वारा: Madan Mohan saxena Madan Mohan saxena

के द्वारा: DR. SHIKHA KAUSHIK DR. SHIKHA KAUSHIK

के द्वारा: vaidya surenderpal vaidya surenderpal

मुझे खेद है लेखक की मानसिकता पर कि किस तरह वे अप्रत्यक्ष रूप से महा भ्रष्ट , मुस्लिम तुष्टिकरण की जननी , आर्थिक पंगुता देने वाली, घोटालों , जन विरोधी योजनाओं वाली कांग्रेस सर्कार का समर्थन कर रहे हैं , क्या लेकहक ने अपनी आँखों पर कांग्रेस की चाटुकारिता का चस्मा लगा रखा है जो उन्हें इतने बड़े पाप करने वाली सरकार में कुछ नहीं दीखता, मुझे हैरत है की वे किस प्रकार कांग्रेस जैसी देश विरोधी पार्टी का आवाहन कर रहे हैं , देश के कठपुतली प्रधान मन्त्री खुद ही स्वीकार कर चुके हैं की वो कई मोर्चों पर विफल रेह चुके हैं , हाँ अंत में कही गयी बात सही प्रतीत होगी देश आपकी कांग्रेस पार्टी से मुक्ति चाहता है और आने वाले आम चुनाव में कांग्रेस का नामो निशान तक नहीं बचेगा

के द्वारा: rajeshseo rajeshseo

भारत जैसे विशाल देश के गरिमामय इतिहास के निर्माता और आज तक के खेवनहार महान कोंग्रेश पार्टी के प्रवक्ताओं और धर्मनिरपेक्षता के फ्रेंचाइजी धारकों को मेरा शाष्टांग ...........प्रणाम ! .......................तमाम देवी देवताओं से सुसज्जित पार्टी ही देश की सबसे बड़ी पार्टी है मेँ भी मानता हूँ माता सोनिया के दरबार मेँ आप लोगों की भक्ति ने देश को आज विश्व की महाशक्ति बना दिया ! आज चारों तरफ एक ही गूंज है अब भारत मेँ विकास की जरुरत ही नहीं रह गयी पानी बिजली और महगाई सब चूतियापे की बातें हैं .........सड़कें तो इस प्रकार की बनी हैं की लगता ही नहीं रोड पर चल रहे हैं या हवा मेँ उड़ रहे है.......बिजली पूरे भारत मेँ जाती ही नहीं कहीं कहीं तो फ़ालतू होने पर फेकनी भी पड़ती है ...........चारों ओर दूध दही की नदिंया बह रही हैं गरीब गुबरे ५ रूपए २ रूपए में काजू बादाम मिश्रित हलवा पूड़ी खा रहे हैं भले ही देवी देवता कोयला खा कर काम चला लें लेकिन मजाल है कि देश कोइ गरीब भूखा रहे ? अमेरिका चीन ,पकिस्तान से बांग्ला देश तक को हमारी ताकत के सामने थर थर कापते हैं एक ओर अमेरिका हमारी महिला अधिकारियों के कपडे उतार कर चेक करते हैं कि हमारी सफलता का रहस्य क्या है और दूसरी तरफ पाकिस्तान हमारे लोगों के सर काट कर हमारी विद्वता पहचानना चाहता है , चीन अपना कूड़ा हमारे यहाँ भेज कर ये जानने के लिए उत्सुक रहता है कि आप लोग उसे कैसे काम में लाते हैं जैसे कि हमारे देश में कभी कभी जेहादी मानसिकता के हिन्दू सर उठाने लगते है हमें देख कर हमारी नक़ल करते हुए बांग्लादेश इन जेहादी तत्तवों को ख़तम करने में लगा हुआ है विश्व के सारे देश हतप्रभ हैं हमारे कर्मों से उन्हें विशवास नहीं होता कि एक ऐसा भी देश है जहां के प्रतिभाशाली विद्द्यार्थियों की उसको जरुरत ही नहीं है बेचारो को इधर उधर नौकरी करनी पड़ती हैं ? क्या करें यहाँ कुछ करने को कुछ बचा ही नहीं है बड़े बड़े आई आर एस ,इंजीनियर यहाँ आम आदमी हैं और झाड़ू लगाते हैं ..............कोई एक दो स्थान जो जिहादी मानसिकता के लोगों की बहुलता के कारण जैसे अविकसित राज्य गुजरात में बचा हुआ काम निपटाने चले जाते हैं बाकी के पास कुछ काम बचा ही नहीं है ! ..............लेकिन हे माता सोनिया ,हे सत्ता का जहर पीने वाले महादेव स्वरुप कुमार राहुल जी आज बड़ी विकट समस्या आन खड़ी है एक रावण ,मौत का सौदागर ,घमंडी ,दानव हमारे देश पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है गौ समान सीधे साधे दुनिंया की सबसे शान्ति पसंद कौम जिसने आतन्कवाद से पूरे विश्व को दूर रखा है और जिसके कारण हमारा देश आज उन उचाईयों तक पहुंचा है जहां बिना उनके सहयोग से सम्भव ही नहीं था ...........अगर विशवास न हो तो फ्रांस ,अमेरिका ,जर्मनी ,जापान ,चीन जैसे देश आज उनकी अनुकम्पा ना होने की वजह से गर्त में जा चुके हैं ये जेहादी उनको समझाना चाहता है बहकाना चाहता है ........................हे चतुर्वेदी जी आप तो चारों ग्रंथों के ज्ञाता है आप मेरी बात जगत माता और जगत कुमार तक पहुचाहिए ...................वैसे तो आप सर्व ज्ञाता हैं ? धन्य हो ,धन्य हो ,धन्य हो !

के द्वारा: dhirchauhan72 dhirchauhan72

के द्वारा: चित्रकुमार गुप्ता चित्रकुमार गुप्ता

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मित्रवर यतीन्द्र जी एक बहस को जन्म दे रहे हैं आप ? आज ९ दिसंबर है और चार राज्यों के परिणाम आ चुके हैं , शायद कांग्रेस को जवाब मिल गया है ! नहीं मिला तो २०१४ ज्यादा दूर नहीं है मिल जाएगा ! गांधी फॅमिली को हमने अपना रहनुमा क्यूँकर बना लिया मैं नहीं जानता लेकिन इतना जरुर जानता हूँ कि इन्ही रहनुमाओं ने भारत से गरीबी नहीं हटने दी ! आज भी लूटने में लगे हैं लेकिन आज जनता ज्यादा समझदार है और उसका परिणाम आप भलीभांति देख रहे हैं ! कभी कोई जीजा बनके लूटता है कभी कोई मंत्री लूटता है ! स्पष्ट है , जब तक कांग्रेस है तब तक इस देश में गरीबी है या ये कहें जब तक गरीबी है तब तक कांग्रेस है ! आप राहुल कि बात करते हैं उस मूर्ख प्राणी को तो ये भी नहीं पता होगा कि १० का नोट कैसा होता है क्यूंकि उसने १० का नोट देखा ही नहीं होगा ! जो डॉलरों में पाला हो वो हमारी गरीबी समझेगा ? हमारी गरीबी का मेला लगाता है वो , नुमाइश करता है वो हमारी गरीबी कि ! बिल फाड़ता है दुनिया को दिखाने के लिए ! पहले वो अपनी माता श्री से पूछे कि क्या उन्हें पहले नहीं पता था कि लालू यादव चोर है ? लेकिन जब अदालत ने फैसला दे दिया तो उसे भी बचाने के लिए बिल ले आइन ? चोरों कि जमात है कांग्रेस और उसका हसरा देख भी रहे हैं आप ! क्या ये देश , ये लोकतंत्र , ये हिंदुस्तान , ये १२३ करोड़ लोगों कि फ़ौज में से सिर्फ कांग्रेस को एक ही बुद्धिमान मिलता है जिसे राहुल कहते हैं ! क्या यहाँ राजतन्त्र है कि राहुल जैसा मुर्ख प्राणी ही इस देश का प्रधानमन्त्री बनेगा ? राहुल कांग्रेस के शहजादे हो सकते हैं भारत के प्रधानमन्त्री नहीं !

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