कलम-पथ

शब्द जिन्दगी के_____यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी

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काश! फिर जन्म लेते पंडित कमलापति त्रिपाठी

Posted On: 25 Aug, 2015 social issues,Celebrity Writer में

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15_YATINDRA jpeg[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]_हर परिवेश का एक सामूहिक स्वभाव होता है, रुचि होती है, रुझान होता है। राजनीति की एक खूबी है, वह वर्तमान में भी इतिहास के सहारे चलती है और इतिहास वह बनाता है जो वर्तमान को गढ़ लेता है। किसी व्यक्ति के जीवन का उतना महत्व नहीं है, जितना इस बात का कि वह व्यक्ति किस प्रकार से जीया। किसी के लिए एक जीवन छोटा होता है तो कोई उसी जीवन काल में अपने समुदाय, समाज के लिए कुछ विशेष काम करके जाता है फिर वह समुदाय, समाज सदैव उस व्यक्ति का ऋणी रहता है तथा वह व्यक्ति अपनी यादों के बहाने हमेशा जिन्दा रहता है। आज भी जिन्दा हैं पंडित कमलपति त्रिपाठी काशी की रगों में यहाँ की विरासत बनकर। उन्होंने बनारस को काशिका शैली में सँवारा। आधुनिक बनारस के निर्माण में यहाँ की परम्पराओं को भी सहेजा ।

सृजनकर्ता जननायक पंडित कमलपति त्रिपाठी जब तक जीवित थे बनारस ही नहीं पूर्वांचल, समूचे उत्तर प्रदेश के आम अवाम के लिए आत्मीय रहे, जिन्होंने अपनी लोकप्रिय छवि और जनसमर्थन से कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में जन-जन की पसंद बना दिया था। रचना सृजन निर्माण व विकास के जनक पंडित कमलापति त्रिपाठी ने अपने भगीरथ प्रयास से विकास की गंगा पूर्वांचल की धरती पर उतारकर नव सृजन हर एक क्षेत्र में विकसित किया। भारत की लोकसेवा में निर्माण व विकास के कार्यों को जोड़कर भारतीय राजनीति को एक नई दिशा दिया।एक सच्चे क्रांतिवीर व विकास के मसीहा पंडित कमलापति त्रिपाठी ने पूर्वांचल के विकास के लिए आजीवन कार्य किया। वे निर्माण व विकास के लिए इतिहास के पन्नों में सुनहले अक्षरों में अंकित रहेंगे। पंडित कमलापति त्रिपाठी न सिर्फ राजनीति की बुनियाद थे बल्कि विकास उनका दूसरा नाम था। बनारस सहित पूर्वांचल में उस दौर के हर एक शख्स के जेहन में पैठ रखते थे चाहे वह पक्ष का हो या विपक्ष का।

आज पंडित कमलापति त्रिपाठी की यादें हर उन आंखों में कैद है जिसने अपने नेता की कार्यशैली को देखा है! महसूस किया है! आज बचपन की वह पीढ़ी लाखों की तादात में युवा हो गयी जिसने न पंडित कमलापति त्रिपाठी को देखा और न ही उनकी आवाज सुनी। वे पंडित कमलापति त्रिपाठी के द्वारा विकास की खड़ी की गयी ईंट-गारों को देखकर अपनों से उस शिल्पी का नाम सुनकर विकास पुरुष को जानने व समझने की कोशिश करते हैं। आज बनारसी-पन का वह राष्ट्रीय जननायक हमारे बीच में नहीं है पर जर्रे-जर्रे से उसके कार्यों, विकास की गाथाओं की आवाज आ रही है।

पंडित कमलापति त्रिपाठी ने जाति, धर्म की राजनीति से ऊपर उठकर विकास के क्षेत्र में बुनियादी कार्य किए। सच्चे राजनेता एवं विकास कार्यों के प्रति सदा प्रयत्नशील शख्सियत पंडित कमलापति त्रिपाठी के उपरांत जिले का विकास ठप हो गया है। विकास पुरुष तो पंडित कमलापति त्रिपाठी ही थे, उनके पश्चात् पूर्वांचल विकास की गति में पिछड़ गया है। वैसे तो पूर्वांचल विकास की गति में पीछे छूट गया है पर बनारस परंपरा में ‘पर्यटक-राजनीति’ की अहम भूमिका इस क्षेत्र में खूब बढ़ी। पंडित कमलापति त्रिपाठी के बाद उत्पन्न हुई राजनीतिक रिक्तता को भरने के लिए भरसक प्रयास के बाद भी जनमानस का स्नेह कोई भी नहीं जीत सके। पंडित कमलापति त्रिपाठी के निर्माण व विकास कार्यों की सीख जनपद के जनप्रतिनिधियों को लेनी चाहिए। आज जनता हर जनप्रतिनिधि में पंडित कमलापति त्रिपाठी के अंश को ढूंढ रही है।

पंडित कमलापति त्रिपाठी इतिहास का एक पृष्ठ लिख गये ! इतिहास का एक पृष्ठ हो गये! काश! एक बार फिर दूसरा पंडित कमलापति त्रिपाठी इस धरती पर जन्म लें और पुनः फिर से सूख चुकी पुरबिया विकास की गंगा को यहाँ अविरल बहने दें।_[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]



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