कलम-पथ

शब्द जिन्दगी के_____यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी

196 Posts

1093 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12689 postid : 1169327

गंगा की बात

Posted On: 26 Apr, 2016 Social Issues में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

15_YATINDRA jpeg
[यतींद्र नाथ चतुर्वेदी]
चिंता पानी और गंगा की बात’,
जल से ज्यादा रुपये की धार,
शुद्ध जल का अमृत सूख रहा,
मन फिर बोला उनीसवीं बार।

बंद करो रुपयों का खेल,
बीकर-सीवर-निर्मल’-भ्रष्टाचार!
सारे बाँध वापस ले कर,
अविच्छिन्न करो अविरल गंगा धार!

राष्ट्रनदी भारत की धड़कन,
गंगा का रोका पानी लौटाकर,
गंगा को जीवित बहने दो,
गंगा फ्री में निर्मल हो जाएगी!
[©यतींद्र नाथ चतुर्वेदी™]



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rafe के द्वारा
April 26, 2016

Very Nice!!!


topic of the week



latest from jagran