कलम-पथ

शब्द जिन्दगी के_____यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी

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वैश्विक शुभलाभ:धवलयात्री डा.मनमोहन सिंह

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16_YATINDRA jpeg[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी] भारत की दो तस्वीर – एक तरफ विश्वगाँव में व्हाइट हॉउस से राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारत से महान अर्थशास्त्री पूर्व प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह के साथ बिताये क्षण अपने जीवन के अविस्मरणीय पल बताये और दूसरी तरफ उन्ही के उत्तराधिकारी प्रधानमंत्री उनकी कार्यशैली की लिहाड़ी ले रहे! इतिहास लिहाड़ियों को माफ़ नहीं करता कभी! सवा अरब आबादी जो कभी दुनिया की उपभोक्ता बाजार थी वह आज अपनी किल्लतों की लाईन में खड़ी है। जब देश आर्थिक तंगी की जद्दोजहद में जूझ रहा हो ऐसे में राजनीतिक लिहाड़ियाँ मानवीय परेशानियों का उपहास है। इतिहास में गाढ़ी स्याही से लिखा है कि भारत की लिहाड़ियों ने सत्य के सौहार्दपूर्ण आँगन में महाभारत गढ़ा है।
#व्हाइटहाउस द्वारा #अमेरिकी #राष्ट्रपति #बराकओबामा के आखिरी ‘#फॉर्मलस्टेटअराइवलसेरेमनी’ में पिछले 8 साल में कुल 14 स्टेट मीट की सभी में से चयनित महत्वपूर्ण 50 फोटोग्राफ्स को समायोजित कर मुख्य फोटोग्राफर पीटे सौज़ा ने जारी किया। इस फोटो सीरीज में भारत से एकमात्र #महान #अर्थशास्त्री पूर्व #प्रधानमंत्री #डामनमोहनसिंह और उनकी धर्मपत्नी #श्रीमतीगुरुशरणकौर की तस्वीर इस एल्बम में सबसे पहले स्थान पर है।इसके अलावा #कनाडा के प्रधानमंत्री #जस्टिनथ्रूडेयू, #चीन के #राष्ट्रपति #शीजिनपिंग,#मेक्सिको के राष्ट्रपति #फिलिपकाल्ड्रेन, #जर्मन #चांसलर #एंजेलामार्केल, #फ्रांस के राष्ट्रपति#फ्रांस्वाओलांद, #जापान के प्रधानमंत्री #शिंजोआबे, #ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री #डेविडकैमरूनऔर #पॉपफ्रांसेस की फोटो भी शामिल हैं।
जब विश्वभर में मंदी का अंधड़ आया तब भारत ने एक विशाल वटवृक्ष की तरह अपनी जमीन को सुदृढ़ता से बांधे रखा। तूफान छटा तब दुनिया के कई शहर नीलाम हो चुके थे! कई संस्थाएं दिवालिया हो कराह रहीं थी! लाखों-लाख शटर गिर चुके थे! दुनिया पलायन के संकरे रास्ते पर ट्रैफिक जाम कर खड़ी होगयी थी! इधर उसी समय भारत मनरेगा से अपनी पगडंडियों पर भारत निर्माण का समृद्ध विश्वगाँव लिख रहा था। मंदी की कठोरता को कुशलता के शार्प हांथों से सजग इतिहास गढ़ रहा था।
वैश्विक मंदी में भारत बिना किसी वित्तीय दुर्घटना के मुस्कुराता हुवा उबर चुका था। और दुनिया इसे अपना सबसे भरोसेमंद हितैषी मान चुकी थी। यह सब हो सका इसलिए क्योंकि भारत और विश्व एक कुशल अर्थशास्त्री पर यकीन कर रहा था। अब जबकि मंदी की त्रासदी से दुनिया उबर चुकी है। अपने-अपने शुभलाभ के कारोबार गढ़ रही है ऐसे में भारत नोट बंदी के दलदल में धंसता जा रहा है।[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]



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