कलम-पथ

शब्द जिन्दगी के_____यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी

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पूस की कैशलेस रात

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15_YATINDRA jpeg©[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]
कतारों की लाखों लाईन में,
छला गया हर नैतिक व्यक्ति!
प्रश्नों के अंतहीन चौराहों पर,
पतली गलियाँ हैं जोह रहीं!
बीता बोझिल दिन पचास,
माघ-पूस की ठिठुरती रात!
किल्लत के काले साए में,
बेबस ठहरा खालिस भारत!

मन की बात कही मनमानी
भूख का जंगल पसरा है!
हाहाकार मचा घर-घर में,
गरीब का चूल्हा रोता है!

काला धन कितना आया,
पूँछ रही भारत की गलियाँ!
शब्दवीर तुम आ जाओ
भारत के किसी चौराहे पर!

विवश किसान, मजूर निराश,
लाचार युवानी धधक रही!
जिन्दा क़ौमे त्राहि-त्राहि कर,
जनादेश वापिस मांग रही!
[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी] ™



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Govind Bharatvanshi के द्वारा
December 31, 2016

किस महल में रहते हो प्रभु ……नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं !


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