कलम-पथ

शब्द जिन्दगी के_____यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी

196 Posts

1093 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12689 postid : 626646

गरीब की वसीयत तो भूख है!

  • SocialTwist Tell-a-Friend

[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी] पेट की अग्नि इंसानियत की भट्टी होती है!भूख की ज्वाला देश की आँच होती है!जिंदगी भूख से शुरू होकर भूख पर ही ख़तम होती है! भूख से रिश्ते जुड़ जाते हैं भूख से रिश्ते बिखर जाते हैं। भूख आम नागरिकों के करीब तक आ पहुँचा है।अधभूखे राष्ट्र को सबसे पहले उसके हिस्से का भोजन चाहिए। कई छोटी छोटी भूख एकजुट होकर पोषण का साम्राज्य रचती हैं। आवाम भूख, गरीबी और पिछड़ेपन से परेशान हैं। आवाम की भूख ही तरक्की का मापदंड है! जिस देश में जितना भूख जिन्दा है, उस देश की तरक्की उतनी ही पीछे है!

गरीब अपने हिस्से के निवाले के सुरक्षा की बात जोह रहा है। भूख और गरीबी सरकारी नहीं होती है। भूख तो गरीबी को लगती है अमीरी को कहाँ!गरीब का पेट तो रुपये की कीमत पर अब नहीं भरता।गरीब की भूख पर महापंचायत भूख का उपहास है। रोटी और चूल्हे धर्म निरपेक्ष होते है। खिन्न कर देने वाली गरीबी की चादर ओढ़ कर कई भारत रोज सो जाते हैं। संघर्ष की आंच पर सपने पकाए जाते हैं।

हमारे एक निवाले पर कई भूख वंचित हैं जबकि तरक्की अनवरत जारी है। गरीब का भूख दाँव पर लगा के आरोप प्रत्यारोप नहीं किये जाते। भूख पर संवेदनशीलता,यही लोकतंत्र की बुनियाद है। आज भी देश में दम घोंटू गरीबी जिन्दा है। जब तक भूख जिन्दा है, तब तक देर कैसी? अनाज भूख का पोषण है, जिससे अवाम वंचित होता जा रहा है। भोजन तो मुफ्त में मिलना चाहिए। फिलहाल भारत की 95 प्रतिशत आबादी को उसके हिस्स्से का खोता जा रहा एक प्याज चाहिए, वह भी किफायती। देश की दो तिहाई आबादी को सस्ता अनाज पाने का उसका हक बहु प्रतीक्षित है। देश की करीब 75 प्रतिशात ग्रामीण और 50 फ़ीसदी शहरी आबादी सहित भारत के 67 प्रतिशत लोगो को उनके निवाले के करीब तक ला दिया है। राजनीतिक चतुराई नागरिकों का पोषण करती है। भूख और विपन्नता के विरुद्ध एक जिहाद है यह दाल रोटी का खाद्य सुरक्षा बिल। शेष अंतिम आदमी की तरक्की के लिए यह एक बुनियादी कदम है, जिसपर भारत निर्माण होना है। गरीबों, वंचितों के हितों के लिए बढे हर कदम हर वक़्त लोकतंत्र का पवित्र अनुष्ठान हैं।

गरीब को एक मुट्ठी अनाज और एक गिलास पीने का साफ़ पानी चाहिए, उसका संसार उसीमें पोषित होता है। गरीब की वसीयत तो भूख है। पोषण और कुपोषण की पतली रेखा के इस पार आवाम है और उस पार राजनीति। तेजी से बढ़ रही दुनिया में आज भी भूख जिन्दा है। गरीब तो अपने हिस्से के भोजन गारंटी की बाट जोह रहा है। देश की तरक्की एक बात है और उस देश के आवाम की तरक्की दूसरी बात। बात भूख के बुनियादी निदान की है और कुछ नहीं।[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]



Tags:                       

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (10 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

6 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Neelima Sharma के द्वारा
October 20, 2013

umda post

    yatindranathchaturvedi के द्वारा
    November 27, 2013

    आदरणीय Neelima Sharma जी, आपकी सराहना, और शुभकामनाये हमारी धरोहर है सादर

sanjay kumar garg के द्वारा
October 18, 2013

यतीन्द्र जी, सादर नमन! बढ़िया ब्लॉग बधाई !

    yatindranathchaturvedi के द्वारा
    November 27, 2013

    आदरणीय sanjay kumar garg जी, आपकी सराहना, और शुभकामनाये हमारी धरोहर है सादर

jlsingh के द्वारा
October 17, 2013

पेट की अग्नि इंसानियत की भट्टी होती है!भूख की ज्वाला देश की आँच होती है!जिंदगी भूख से शुरू होकर भूख पर ही ख़तम होती है! भूख से रिश्ते जुड़ जाते हैं भूख से रिश्ते बिखर जाते हैं। भूख आम नागरिकों के करीब तक आ पहुँचा है।अधभूखे राष्ट्र को सबसे पहले उसके हिस्से का भोजन चाहिए। कई छोटी छोटी भूख एकजुट होकर पोषण का साम्राज्य रचती हैं। आवाम भूख, गरीबी और पिछड़ेपन से परेशान हैं। आवाम की भूख ही तरक्की का मापदंड है! जिस देश में जितना भूख जिन्दा है, उस देश की तरक्की उतनी ही पीछे है! रोटी और चूल्हे धर्म निरपेक्ष होते है। बहुत ही बेहतरीन पोस्ट के लिए आपको बधाई आपको यतीन्द्र जी!

    yatindranathchaturvedi के द्वारा
    November 21, 2013

    आदरणीय जवाहर लाल जी, आपकी शुभकामनाये हमारी ऊर्जाश्रोत हैं। सम्बल हैं।


topic of the week



latest from jagran