कलम-पथ

शब्द जिन्दगी के_____यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी

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आम आदमी के आँगन में राहुल गांधी का पोषित लोकतंत्र “Jagran Junction Forum”

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15_YATINDRA jpeg [यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]_सदियों से विरासतों के अस्तित्व और परम्पराओं की साख पर दुविधाओं, बिलगावों, बुराईयों, को कुचलकर एकता की हिफाजत करता हुवा, रिश्तों के फरेब पर भरोसे की स्थापना करता, दूर जा बस चुके अपनों के एकजुट होने की ललक है भारत का लोकपथ। आजादी के पहले से और आजादी के बाद भारत ने दिन-रात के सपने को संजोया है। भूखे-नंगे पैरों के भारत ने आज तरक्की के नए मापदंड वाले मुहाने पर खड़ा सम्मान के साथ जीना सीख लिया है। ऐसे में सदियों की थाती बटोर, भारत की एक-एक आबादी को समेटकर मेहनत की कलम, पसीने की स्याही और ईमान के पन्नों पर सदियों से लिखी जाती रोटी और कलम के सपनों का साम्राज्य निर्माण करना है। दुनिया जहां आज हिंदुस्तान की औऱ अपने अंधेरों का सूर्योदय पाने की आशा में मुड़ने लगी है, वहीं देखते देखते भारत विश्वशक्ति हो चला है। ऐसे समय के इतिहास बन रहे इस मोड़ पर हम समय का वह दस्तावेज हैं, जिनपर कल, आज और कल को वर्त्तमान बनाकर हिंदुस्तान को खड़ा होना है। हमारे पीछे एक महान विरासत है। एक ऐसी बुनियाद जिसने भारत को आजाद कराया। एक ऐसी परम्परा जिसने एक प्राचीन सभ्यता के बीच एक आधुनिक देश भारत का निर्माण किया। एक ऐसी निष्टा जिसने बीसवीं शताब्दी को कांग्रेस की शताब्दी बनाया और इक्कीसवीं शताब्दी भी तो कांग्रेस की ही शताब्दी की और अग्रसर है। बीसवीं सदी के पहले आधे हिस्से में कांग्रेस के ही अथक संघर्ष और युवाओं के असीम त्याग की वजह से दुनिया के सबसे ताकतवर साम्राज्य से आजादी मिली और न उगने वाला सूरज भी उगा, और अब यह भी कांग्रेस ही थी जिसने शताब्दी के दूसरे हिस्से में आजाद भारत को आधुनिकतम सम्प्रभुता संपन्न संघीय गणराज्य बनाया।
राजनीति; जिसकी प्राथमिकता भटक चुकी है। जनमानस आधारभूत सुविधाओं को बड़ी शिद्दत से मुहैया करा पाता है। रोजमर्रा के भूख का भयावह साम्राज्य फ़ैल चुका है। बेरोजगारी, चरमसीमा में है। भ्रष्टाचार से समाज पीड़ित है। अवाम नुक्सान अधिक, फायदा कम की बुनियाद पर जिंदगी जीने को मजबूर है। यह नयी शुरुवात का समय है। नए संकल्प का समय है। एक ऐसा समय जब हमें युवाओं को उसका पुराना गौरव वापस लाने, राष्ट्रीय क्षितिज में अपनी प्रमुखता स्थापित करने की शपथ लेनी है। चुनौतियां अनेक है, और बहुत बड़ी हैं। बिना विचलित हुवे उनका मुकाबला करना है। हमारे समाज के कमजोर लोग बराबरी चाहते हैं,मेहबानी नहीं।
समय के इन्ही पद-चिन्हों पर जनादेश 2014 की ओर सभी राजनीतिक दलों के साथ भारत के सबसे बड़े राजनीतिक दल कांग्रेस के बढ़ चुके कदम राहुल गांधी की प्रयोगशाला से होकर गुजरता है। श्री राहुल गांधी पुरुखों के त्याग, बलिदान की विरासत पर भविष्य की योजनाओं की बुनियाद रख रहे हैं। बुनियादी हालातों से वाकिफ होने और अपने संगठन को आत्मसात करने के बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा है। पहले सांसद बनकर उन्होंने जमीनी राजनीति की नब्ज टटोला और फिर उपाध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने संगठन को समझा। देश के आम आदमी के जीवन शैली में सुधार, राष्ट्रीय एकता, जातीय सद्भावना, शांति और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के मूलमंत्र वाले राहुल गांधी जिनके शब्द अवाम के लिए बने। जिसकी हर सांस अवाम के लिए चली। शांत और आक्रामक दोनों लहजों वाले राहुल गांधी को भविष्य की जरूरत के रूप में देखा जा रहा है। आम आदमी के आँगन में राहुल गांधी का लोकतंत्र पोषित होता है। आम आदमी के सम्मान के प्रति संवेदनशील राहुल गांधी पर देश भरोसे की स्थापना करना चाहता है। अवाम की खुशहाली के साथ हर हाँथ को काम, इंसान को सम्मान की प्राथमिकता वाले राहुल गांधी देश की नब्ज हैं। देश के सबसे पुराने पहले राजनीतिक परिवार से संबंधित होने की वजह से उनके अनुभव पर शक करना पूर्णतया बेमानी है क्योंकि पृष्ठभूमि अपने आप में अनुभव प्रदान करती है। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की मनरेगा, सूचना का अधिकार, आदिवासी सशक्तिकरण, कृषि ऋण माफी, पारदर्शिता, विकास, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, ऊर्जा की उपलब्धियों में राहुल गांधी की संवेदनशील भूमिका महत्वपूर्ण है। जवाहर लाल नेहरू द्वारा ‘भारत की खोज’ के लोकतान्त्रिक विरासत में राहुल गांधी भारत की पुनर्खोज की कार्यशाला हैं।[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]



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15 प्रतिक्रिया

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yatindranathchaturvedi के द्वारा
December 11, 2013

जवाहर लाल नेहरू द्वारा ‘भारत की खोज’ के लोकतान्त्रिक विरासत में राहुल गांधी भारत की पुनर्खोज की कार्यशाला हैं।

    yatindranathchaturvedi के द्वारा
    December 11, 2013

    श्री राहुल गांधी पुरुखों के त्याग, बलिदान की विरासत पर भविष्य की योजनाओं की बुनियाद रख रहे हैं।

    yatindranathchaturvedi के द्वारा
    December 11, 2013

    समय के इन्ही पद-चिन्हों पर जनादेश 2014 की ओर सभी राजनीतिक दलों के साथ भारत के सबसे बड़े राजनीतिक दल कांग्रेस के बढ़ चुके कदम राहुल गांधी की प्रयोगशाला से होकर गुजरता है।

yogi sarswat के द्वारा
December 9, 2013

मित्रवर यतीन्द्र जी एक बहस को जन्म दे रहे हैं आप ? आज ९ दिसंबर है और चार राज्यों के परिणाम आ चुके हैं , शायद कांग्रेस को जवाब मिल गया है ! नहीं मिला तो २०१४ ज्यादा दूर नहीं है मिल जाएगा ! गांधी फॅमिली को हमने अपना रहनुमा क्यूँकर बना लिया मैं नहीं जानता लेकिन इतना जरुर जानता हूँ कि इन्ही रहनुमाओं ने भारत से गरीबी नहीं हटने दी ! आज भी लूटने में लगे हैं लेकिन आज जनता ज्यादा समझदार है और उसका परिणाम आप भलीभांति देख रहे हैं ! कभी कोई जीजा बनके लूटता है कभी कोई मंत्री लूटता है ! स्पष्ट है , जब तक कांग्रेस है तब तक इस देश में गरीबी है या ये कहें जब तक गरीबी है तब तक कांग्रेस है ! आप राहुल कि बात करते हैं उस मूर्ख प्राणी को तो ये भी नहीं पता होगा कि १० का नोट कैसा होता है क्यूंकि उसने १० का नोट देखा ही नहीं होगा ! जो डॉलरों में पाला हो वो हमारी गरीबी समझेगा ? हमारी गरीबी का मेला लगाता है वो , नुमाइश करता है वो हमारी गरीबी कि ! बिल फाड़ता है दुनिया को दिखाने के लिए ! पहले वो अपनी माता श्री से पूछे कि क्या उन्हें पहले नहीं पता था कि लालू यादव चोर है ? लेकिन जब अदालत ने फैसला दे दिया तो उसे भी बचाने के लिए बिल ले आइन ? चोरों कि जमात है कांग्रेस और उसका हसरा देख भी रहे हैं आप ! क्या ये देश , ये लोकतंत्र , ये हिंदुस्तान , ये १२३ करोड़ लोगों कि फ़ौज में से सिर्फ कांग्रेस को एक ही बुद्धिमान मिलता है जिसे राहुल कहते हैं ! क्या यहाँ राजतन्त्र है कि राहुल जैसा मुर्ख प्राणी ही इस देश का प्रधानमन्त्री बनेगा ? राहुल कांग्रेस के शहजादे हो सकते हैं भारत के प्रधानमन्त्री नहीं !

    yatindranathchaturvedi के द्वारा
    January 15, 2014

    स्वागत है आदरणीय yogi sarswat जी, सादर

seemakanwal के द्वारा
December 3, 2013

आगाज़ ये है तो अंजाम होगा हसीन .आभार

    yatindranathchaturvedi के द्वारा
    December 5, 2013

    आदरणीय seemakanwal जी, हम लोग तो चरणबद्ध चल रहे है, जहां किसी भी जीत हार से कहीं अधिक महत्त्व नैतिकमूल्यों की सतत सुरक्षा है। सादर, आपका ही ।

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
December 1, 2013

मान्यवर यतीन्द्र जी, सादर ! भाषा और भाव की दृष्टि से बड़ा ही सशक्त आलेख ! पर आप के इस राजनैतिक विश्लेषण के प्रतिफल का अभी इंतज़ार करूंगा !

    yatindranathchaturvedi के द्वारा
    December 1, 2013

    आदरणीय Acharya Vijay Gunjan जी, हम लोग तो चरणबद्ध चल रहे है, जहां किसी भी जीत हार से कहीं अधिक महत्त्व नैतिक मूल्यों की सतत सुरक्षा है। आपकी सद्भावना हमारी मानसिक ऊर्जा है। सादर, आपका ही ।

jlsingh के द्वारा
December 1, 2013

आदरणीय यतीन्द्र जी, सादर अभिवादन! देखना है, इस पांच राज्यों के चुनाव परिणाम क्या आते हैं, इसी से फैसला हो जायेगा…. मोदी या राहुल! आपका सकारात्मक प्रयास जरी रहनी चाहिए!

    yatindranathchaturvedi के द्वारा
    December 1, 2013

    आदरणीय जवाहर लाल जी, हम लोग तो चरणबद्ध चल रहे है, जहां किसी भी जीत हार से कहीं अधिक महत्त्व नैतिकमूल्यों की सतत सुरक्षा है। सादर, आपका ही ।

December 1, 2013

मेहनत व् ईमानदारी इंसान को कहाँ से कहाँ पहुंचती हैं सभी जानते हैं और राहुल गांधी ऐसी ही मान्यताओं को मानने वाले हैं .

    yatindranathchaturvedi के द्वारा
    December 1, 2013

    आदरणीय शालिनी कौशिक एडवोकेट जी, आपकी सद्भावना हमारी मानसिक ऊर्जा है। सादर

Ravindra K Kapoor के द्वारा
November 30, 2013

मुझे लगता है कि जिस कांग्रेस ने देश को दिशा और स्वतंत्रता दी, जिसमे मेरे पिता कि १९२० से १९५० तक कि कुर्बानिया भी सम्म्लित हैं वो कांग्रेस अब नहीं बची है और न ही वो मार्गदर्शक नेता बचे हैं. अब तो राजनीति को पैसा कमाने कि मशीन समझ उसे चलाने वाले बाहुबली बचे हैं. शायद कांग्रेस को राजनीति से कुछ दिनों के लिए अलग हो अपने अब तक के नतीजों और नतीजों पर गहन मंथन कर पांच साल बाद यह प्रयत्न करना चाहिए. राहुल गांधीजी चाहे भले ही एक निष्कलंक और अच्छे इंसान हों पर उन्हें घेरे उनकी मंडली में बहुत से मैले चहरे हैं. सुभकामनाओं के साथ Ravindra K Kapoor

    yatindranathchaturvedi के द्वारा
    December 1, 2013

    आदरणीय Ravindra K Kapoor जी, आपकी सद्भावना हमारी मानसिक ऊर्जा है। सादर


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