कलम-पथ

शब्द जिन्दगी के_____यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी

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मंदी का महायुद्ध“Jagran Junction Forum”

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21_YATINDRA jpeg [यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]
मंदी के इस महायुद्ध में
रुपये के पीछे
सवा अरब आत्मबल जूझ रहा है।
1 रुपये में 70 डालर का
सपना बोने का यह
एक संवेदनशील समय है|
शताब्दी के सबसे गहरे
आर्थिक संकट का
सामना करता हुवा भारत
सभी की चिकित्सा, शिक्षा,
रोजगार के अवसरों के लिए जूझ रहा है।
यह भारत के लिए
बुनियादी मंथन की घड़ी है,
और हर स्तर पर भारत में
आर्थिक बदलाव लाने का समय है ।
वैश्विक कठिनाई के
इस दौर में भारत उम्मीद की
किरण के समान हैं।
भारत दुनिया को नेतृत्व दे सकता है
लेकिन अपनी मर्जी के मुताबिक
उसे चला नहीं सकता।
भारत का नया सवेरा हो रहा है!
यह भारत के लिए
एक ऐतिहासिक क्षण है।
जिसे भविष्य की
अनेक चुनौतियों का सामना करना है।
बुनियादी जरूरतों में
गैर भारतीय संसाधनों पर
आश्रित हो कर
भारत कलम-कुदाल की बोली में
संयुक्त-राष्ट्र-संघ की ओर नहीं गया!
जबकि तरक्की के महायुद्ध में
महंगाई का पलड़ा भारी होता जा रहा है।
डालर की लालसा,
रुपये से दूर कर रही है।
डालर रुपये को छका रहा
और
रूपया अवाम को!
[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]



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13 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

abhishek shukla के द्वारा
December 5, 2013

सरकार कि सारी नीतिया आम आदमी के लिए बस दिखावा है, सार्थक अभिव्यक्ति

    yatindranathchaturvedi के द्वारा
    December 5, 2013

    आदरणीय abhishek shukla जी, आपकी सद्भावना हमारी मानसिक ऊर्जा है। सादर

jlsingh के द्वारा
December 3, 2013

डालर रुपये को छका रहा और रूपया अवाम को! वाह, क्या बात कही है आपने, आदरणीय यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी जी!

    yatindranathchaturvedi के द्वारा
    December 5, 2013

    आदरणीय jlsingh जी, आपकी सद्भावना हमारी मानसिक ऊर्जा है। सादर

sadguruji के द्वारा
November 30, 2013

आदरणीय यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी जी,बहुत अच्छी कविता लिखने के लिए बधाई.ये पंक्तिया विशेष लगीं- डालर की लालसा, रुपये से दूर कर रही है। डालर रुपये को छका रहा और रूपया अवाम को!

    yatindranathchaturvedi के द्वारा
    December 1, 2013

    आदरणीय sadguruji जी, आपकी सद्भावना हमारी मानसिक ऊर्जा है। सादर


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