कलम-पथ

शब्द जिन्दगी के_____यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी

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पत्रकारिता:भारत की अस्मिता भी बुनियाद भी “Jagran Junction Forum”

Posted On: 22 Feb, 2014 social issues,Junction Forum,Celebrity Writer में

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15_YATINDRA jpeg [यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]_कलम,कागज,स्याही या कैमरा,वाचक,स्टूडियों ये सभी मिडिया की बुनियाद है। ये सभी मिलकर एक शब्द बनाते है जिसे समाज का हम आवाज कहते है। यह बात अलग है कि अब स्याही काली ही नहीं बहुरंगी भी हो गयी है। अक्षरों के, शब्दों के, कर्मयोगी के साथ पवित्र,ईमान,न्याय जैसे अति संवेदनशील शब्द जुड़े होते हैं। ईमान के पन्नों पर ही मेहनत की कलम और पसीने के स्याही से सच लिखा है, यही समाज की अवधारणा है। लिखने वाले कई आये, बहुत कुछ लिखे और समय के साथ अलविदा हो गए पर आज भी उनके शब्द इतिहास के पन्नों पर जिन्दा हैं। शब्द ही अमर है बाकी कुछ नहीं। कलमकार,पत्रकार समाज की स्थितियों का सिर्फ चित्रण ही नहीं, वह समाज के सोए हुए आत्मसम्मान को जगाने का काम भी करता है। कलमकार,पत्रकार वीरों में हुंकार भरता है और वही है जो नि:स्वार्थ भाव से समाज के दबे-कुचले लोगों की आवाज को ऊपर तक पहुंचाता है। जिस दिन देश के कलमकार,पत्रकार सो गये, उस दिन यह देश मटियामेट हो जाएगा। अपने समय के कलमकार का सम्मान करना प्रत्येक समाज का नैतिक दायित्व है।

भारत में मीडिया अपने आदर्श और मानक स्थिति में है, जहाँ न वह बहुत स्वतंत्र हैं और न ही बहुत अधिक बँधा हुवा। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स के ताजा सर्वे के आधार पर भारतीय मीडिया पर महापंचायत गलत है। वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स 2014 के सर्वे भारतीय मिडिया का चेहरा नहीं बन सकता। इसकी बात भी करें तो भारतीय मीडिया की स्वतंत्रता न टॉप 10 में है, न निचले पायदान से टॉप 10 में है। जबकि यह सर्वे स्वयं में विरोधाभासी प्रतीत हो रहा है। पश्चिम की यह रीति रही है, भारत को नगण्य रख कर भारत की बौद्धिक सम्पदा को हथिया लो और फिर पश्चिमी सभ्यता के सूर्योदय की रौशनी भारत को भी थोडा सा दे दो।

मिडिया का जनक देश भारत है। पत्रकारिता की पवित्रता भारत से ही घोषित होती है। भारत की आजादी में पत्रकार राष्ट्र के अमर सेनानी रहे। रचनाकारों, पत्रकारों के लिखे शब्द देश और दुनिया की आवाज बने। वो कलमें जो अनाम थी उनकी भी स्याही देश के लिए अपना क़तरा-क़तरा न्योछावर कर रही थी। जो लिखा जा सका वह भारत की अस्मिता बन गया, और जो पन्नों में बिखर गया वह छिटक कर भारत की बुनियाद बन गया। कलम से निकले शब्द ये अमर हो गए:
गगन बेंच देंगे चमन बेंच देंगे,
शहीदों के ये तो कफ़न बेंच देंगे।
कलम के सिपाही अगर सो गये,
वतन के मसीहा वतन बेंच देंगे ॥”
[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]



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5 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

abhishek shukla के द्वारा
February 28, 2014

बेहतरीन सर! अंतिम पंक्तियों ने दिल जीत लिया. हम सोने वालों में से नहीं हैं…उखाड़ फेकेंगे ऐसी सरकार को जिसने वतन का सम्मान नहीं किया…

deepakbijnory के द्वारा
February 28, 2014

एकदम सही कहा आदरणीय यतीन्द्र जी गगन बेंच देंगे चमन बेंच देंगे, शहीदों के ये तो कफ़न बेंच देंगे। कलम के सिपाही अगर सो गये, वतन के मसीहा वतन बेंच देंगे ॥ http://deepakbijnory.jagranjunction.com/2014/02/25/वृक्षारोपण-कविता/


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