कलम-पथ

शब्द जिन्दगी के_____यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी

196 Posts

1093 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12689 postid : 714893

कुर्बानियों का रेले पर मोदी की लहर[Jagran Junction Forum]

Posted On: 10 Mar, 2014 social issues,Contest,Celebrity Writer में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

15_YATINDRA jpeg[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]_अथाह समुद्र की लहर भी अपने खारे जलप्रवाह का बलिदान नहीं लेता, हाँ जनहित को आगे जाने के लिए स्वयं का बलिदान दे सूर्य की तपिश को आत्मसात करके आकाश के रास्ते धरती को धानी करने निकल पड़ता है। समुद्र की वही बूँद ओस की अमृत बनकर फिर अपनी समुद्र यात्रा को निकल पड़ता है। बलिदान समुद्र ने नहीं, बूँद-बूँद ने कदम-कदम पर दिया। और धरती जिन्दा है। पर, राजनीति की क्रूर नैतिकता अपनों को घुटन दे ही देती है। राजनीति में बूँद का बलिदान नहीं, समुद्र ही छिटकाता है अकसर।

यही बात प्रतीक्षा सूची वाले प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को लांच करने में लगातार होता रहा। बुनियादी वरिष्ठ स्तम्भ अडवाणी जी की क़ुरबानी से शुरू हुवा यह सिलसिला उस पीढ़ी के सभी नेताओं में खामोश सन्नाटा भर दिया। यह लहर कैसी जिसमे अपनों, बुजुर्गो,बुनियादी स्तम्भो का विशाल जन सैलाब, स्थानीय हक़दारों की कुर्बान लेते रहा जाय।

एक के बाद एक अमर्यादित अभिभावकीय बढ़ते हुवे कदम पर बीजेपी के अन्तःपुर को लगता है कि बनारस की अवाम लावारिस है, तभी तो बनारस के लिए फिर से एक नेता आयात हो रहा है। स्थानीय नेताओं की एक पीढ़ी कुर्बान होकर एक आयातित नेता को स्थापित करता है। हक़ छीनने और हक़ जताने में बीजेपी सिद्धहस्त है। बीजेपी के नेता आयात और हकबन्दी में बनारस के स्थानीय नेताओ की एक पीढ़ी नष्ट हो गयी। बनारस के नागरिक अवाक है, उनका नेता आयातित ही है। उत्तर प्रदेश का जनादेश पर-प्रांतियों के लिए मांगना लोकतान्त्रिक चलाकी है। बनारस की जनता राजनीतिक आपातकाल में है, जिसका नेता उसके घर का नहीं दूर गांव का वासी है।_[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]



Tags:

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (8 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

3 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

nishamittal के द्वारा
March 10, 2014

चतुर्वेदी जी मेरे विचार से क्योँ हम दूसरों की समस्या पर विचार करें क्योंकि हर दल की अपनी नीतियां हैं .विचारार्थ बहुत से सार्थक विषय हैं..

jlsingh के द्वारा
March 10, 2014

आदरणीय यतीन्द्र जी, सादर अभिवादन! आपकी चिंता वाजिब है …एक और महाभारत होनेवाला है …कहने को धर्मयुद्ध पर रण जीतना ही मकसद है. …जनता सब कुछ देख रही है कुछ लोग मुखर हैं बाकी सब मौन हैं और मौन सर्वोत्तम भाषण है! सादर!


topic of the week



latest from jagran