कलम-पथ

शब्द जिन्दगी के_____यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी

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पग पग रावण पनप रहा“Jagran Junction Forum”

Posted On: 22 Sep, 2014 social issues,Junction Forum,Celebrity Writer में

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[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]
हर साल जलाया जाता
मरता जाता
जलता जाता
फिर आ जाता
रावण सदियों से
फिर भी बचता आता
नगरों के जंगल में
आज भी सीता-हरण हो रहा
कितने जटायु मारे जाते
कितनी लक्ष्मण-रेखा
मिटती जाती।
जितने रावण पैदा होंगे
उतने राम सदा जन्मेंगे
यह भी अमृत ढीठ बड़ा
श्रोत सूख-सूख फिर फूट रहा
व्याकुल राम न विचलित होंगे|
राम प्रतिज्ञा में हथप्रभ
सारे रावण ढूंढ रहे।
पग पग रावण पनप रहा
राम भरोसा बोते जाते।
चलो आज सारे रावण
अपने हिस्से का
राम पा गए।
[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]



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