कलम-पथ

शब्द जिन्दगी के_____यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी

196 Posts

1093 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12689 postid : 805617

इंदिरा गांधी कांग्रेस की ही सगी नहीं, सवा सौ करोड़ भारतीयों की स्मृतिशेष

  • SocialTwist Tell-a-Friend

15_YATINDRA jpeg[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]_श्रीमती इंदिरा गांधी जी ने जो बुनियादी सपने बोये वह आज भारत की युवानियों का वजूद है। हमारे पीछे एक महान विरासत है, एक ऐसी विरासत जिसने भारत को आजाद कराया, एक ऐसी विरासत जिसने एक प्राचीन सभ्यता के बीच एक आधुनिक देश का निर्माण किया! स्वाधीनता संग्राम सेनानी, भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी सिर्फ कांग्रेस पार्टी की ही सगी नहीं वरन सवा सौ करोड़ भारतीय नागरिकों की स्मृति शेष हैं। ‘शांति-वन’ के बाद ‘शक्ति-स्थल’ पर भी अनुपस्थित पुरुखों की वसीयत पर खड़ी भारत की सरकार विरासत का रुख मोड़ रही है। सरकार को देश के सेनानियों को लेकर भेदभाव नहीं दिखाना चाहिए। उसका इस तरह का आचरण अत्यंत संवेदनहीन है।
अब तक भारत के जितने भी प्रधानमंत्री हुए हैं, उन सभी की अनेक विशेषताएँ हो सकती हैं, लेकिन इंदिरा गाँधी के रूप में जो प्रधानमंत्री भारत भूमि को प्राप्त हुआ, वैसा प्रधानमंत्री अभी तक दूसरा नहीं हुआ है क्योंकि एक प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने विभिन्न चुनौतियों का मुक़ाबला करने में सफलता प्राप्त की। देश की कोई भी समस्या हो, विपक्ष की ग़लतियाँ हों, कूटनीति का अंतर्राष्ट्रीय मैदान हो अथवा युद्ध हो, श्रीमती इंदिरा गाँधी ने स्वयं को सफल साबित किया। श्रीमती इंदिरा गाँधी, नेहरू के द्वारा शुरू की गई औद्योगिक विकास की अर्द्ध समाजवादी नीतियों पर क़ायम रहीं। उन्होंने सोवियत संघ के साथ नज़दीकी सम्बन्ध क़ायम किए और पाकिस्तान-भारत विवाद के दौरान समर्थन के लिए उसी पर आश्रित रहीं। जिन्होंने इंदिरा गाँधी के प्रधानमंत्रित्व काल को देखा है, वे लोग यह मानते हैं कि इंदिरा गाँधी में अपार साहस, निर्णय शक्ति और धैर्य था। उन्होंने बैंकों, खदानों, तेल कंपनियों का राष्ट्रीयकरण कर दिया, पूर्व महाराजाओं की पदवियां और सुविधाएं ख़त्म कर दीं और 1971 का आम चुनाव ‘ग़रीबी हटाओ’ के जोशीले नारे के साथ जीत लिया। साठ के दशक के अंत तक भारत ने आत्मनिर्भर आर्थिक विकास पर ज़ोर देकर औद्योगिक क्षमता और प्रौद्योगिकी का एक आधार हासिल कर लिया था। श्रीमती इंदिरा गाँधी ने उम्मीदों भरा लोक कल्याणकारी जो समाजोपयोगी क़दम उठाए उनमें प्रमुख हैं-यह प्रस्ताव पारित करवाया कि संसद में पारित हुए विधेयकों को निरस्त करने का अधिकार उच्चतम न्यायालय को नहीं होगा। हदबंदी क़ानून को पूरी तरह लागू किया गया। अतिरिक्त भूमि को लघु कृषकों एवं भूमिहीनों के मध्य वितरित किया गया। केंद्र की अनुशंसा पर राज्य सरकारों ने भी विधेयक पारित करके इन क़ानूनों को राज्य में लागू करने का कार्य किया। आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों को सस्ती दरों पर खाद्यान्न प्रदान करने की योजना का शुभारंभ किया गया। ग्रामीण बैंकों की स्थापना अनिवार्य की गई और उन्हें यह निर्देश दिया गया कि किसानों एवं कुटीर उद्योगों की स्थापना करने वाले लोगों को सस्ती ब्याज दर पर पूँजी उपलब्ध करवाएँ। ज्वॉइट स्टॉक कंपनियों द्वारा जो राजनीतिक चंदा प्रदान किया जाता था, उस पर रोक लगा दी गई ताकि धन का नाजायज़ उपयोग रोका जा सके। परमाणु बम बनाने की क्षमता हासिल करने के लिए राजस्थान के पोकरण में परमाणु विस्फोट किया गया।_[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]



Tags:     

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (7 votes, average: 4.43 out of 5)
Loading ... Loading ...

1 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

jlsingh के द्वारा
November 20, 2014

इंदिरा जी भारत की महान विभूतियों में एक हैं… उनको श्रद्धासुमन!


topic of the week



latest from jagran