कलम-पथ

शब्द जिन्दगी के_____यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी

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दिल्ली-सल्तनत:800 साल बाद आज हिंदुओं की नहीं,सवा सौ करोड़ जनाकांक्षाओं की सरकार है

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16_YATINDRA jpeg[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]_आवाम को हिन्दुस्तान चाहिए, हिन्दू-मुस्लिम पर राजनीति नहीं। देश को रामराज्य चाहिए, राम पर राजनीति नहीँ।हिन्दू और मुस्लिम के बीच जहर पैदा करने वाले श्री अशोक सिंघल को न तो हिन्दू इतिहास की जानकारी है और न ही मुस्लिम इतिहास के साथ भारतीय लोकतंत्र के संघर्ष, आजादी की सफलता, और भारतीय संविधान सहित निर्वाचन प्रक्रिया के इतिहास की जानकारी है। खेद है उन्हें यह भी पता नहीं कि “प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 800 वर्षों के बाद पहले हिन्दू शासक” नहीं हैं। वह भारतीय लोकतंत्र के बहुमत से निर्वाचित और साथ ही अल्पमत के भी प्रधानमंत्री हैं। जिन्होंने श्री नरेंद्र मोदी को वोट नहीं दिया और जिन्होंने किसी को भी वोट नहीं दिया या फिर दूसरों को वोट दिया, उन समूचे भारतवंशी हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई सहित सभी भारतवासीयों के प्रधानमंत्री हैं। खुद श्री नरेंद्र मोदी के शब्दों में वह सवा सौ करोड़ जन-आकांक्षाओं के प्रधानमंत्री हैं और इस गिनती में मुस्लिमों की समूची आबादी भी शामिल है। फिर यह हिन्दू-मुसलमान की सुनामी लहरें कैसी? जो जब जी चाहे जनता के आँगन में हिलोर ले लेती है और नागरिक सिहर उठता है अकसर।
भगवान राम भारत की आत्मा है, अस्सी प्रतिशत धड़कनों में राम बसते है, पर धड़कनों पर राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत की आबो-हवा मे भगवान राम हैं, जिसे राजनैतिक रंग देना सनातन परंपरा का मखौल है। राम आस्था के भगवान हैं, जिसे राजनीतिक लालसाओं ने वोट-बैंक बना रखा है। राम तो वचन के देवता है, उन्ही से वादा-खिलाफी हो गयी। राम तो विश्वास के देवता है, उन्ही से विश्वासघात हो गया। राम तो मर्यादा पुरुषोत्तम है, उन्ही के लिये मर्यादाएं छिन्न-भिन्न हो गयी है। राम तो त्याग के देवता हैं, उनके नाम पर कितना रूपया बटोर गए लोग। दाता एक राम है, पर उन्हीं को उनके घर से वंचित कर दिया ग़या। रघुपति-राघव-राजाराम की अयोध्या सूनी पडी है और दाँव पर भगवान को लगा दिया है।
मंच पर राम का नाम लगा, जमीन पर व्याकुल जनता का जनहित लावारिस पड़ा है। राम तो राज्य देने वाले देवता हैं। उनसे राज्य की बजाय वोट मांग रहे हैं। राम तो भारत की आस्था है। जनता के जनार्दन है। राम ईमान के देवता हैं उनके नाम पर भाजपा ने बडा भ्रष्टाचार कर डाला है। भगवान राम के देश में ‘हे राम’ का उच्चारण कराने वाले लोगों ने समय-समय पर राम पर ही दांव लगाया है। श्री अशोक सिंघल ; इनका अवसरवादी हिन्दू आंदोलन फ्लॉप हो चुका है। ‘कोठारी-बन्धुवों’ सहित अनगिनत रामभक्त कार-सेवकों की आत्मा को आज तक शांति नहीं मिल सकी है। फिर से लाशों की क्रूर राजनीति में भावुक नागरिकों को झोंकने का षड्यंत्र रचा जा रहा है । नफ़रत की हर दीवार राष्ट्रघाती है आत्मघाती है। हिंदुत्व के एहतराम पर चोट देना बीजेपी का दुराग्रह है। हिंदुत्व परोसकर लगाया जा रहा ‘हिन्दू’ के नाम पर ध्रुवीकरण का आखिरी दांव।_[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]



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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bhagwandassmendiratta के द्वारा
December 21, 2014

सर्वप्रथम “ब्लागर ऑफ दा वीक” होने पर बहुत बहुत बधाई| बहुत ही सारगर्भित लेख लिखने के लिए एक बार फिर से बधाई| इन लेखों के माध्यम से शायद धर्म और समाज के उन तथाकथित ठेकेदारों तक ये सन्देश पहुँच सके कि आम लोग क्या सोचते व् क्या चाहते हैं वरना उनको तो धार्मिक भावनाओं को भड़का कर अपनी रोटियां सेकना बखूबी आता है| हम लोगों को समझना ही होगा कि राम किसी कि निजी संपत्ति नहीं हैं न ही धर्म कोई व्यापार या राजनीती है धर्म तो जीवन जीने का एक आवश्यक तत्व है जिसके बिना संसार में अराजकता और अन्धकार ही होगा जीवन नहीं| कुछ लोग राम के नाम को अपने हाथ कि कठपुतली बना कर इस कदर घसीट रहे हैं कि उनकी मर्यादा एवं त्याग की छवि को ही मिटा कर रख दिया है| भगवानदास मेहंदीरत्ता

sadguruji के द्वारा
December 20, 2014

आदरणीय यतीन्द्र नाथ जी ! संक्षिप्त, परन्तु अच्छा लेख ! सार्थक, पठनीय और विचारणीय ! राम पर राजनीति करने के लिए जितनी भाजपा दोषी है उतनी ही कांग्रेस भी दोषी है ! अयोध्या में रामलला की प्रतिबंधित पूजापाठ फिर से उसी ने शुरू कराई थी ! बेस्ट ब्लॉगर आफ दी वीक चुने जाने की बधाई !

jlsingh के द्वारा
December 20, 2014

आदरणीय यतीन्द्र नाथ जी, सादर अभिवादन और सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर के लिए हार्दिक बधाई! आपने एक सांस में सब कुछ कह डाला, अशोक सिंघल, परवीन तोगड़िया योगी आदित्यनाथ और साध्वी निरंजन ज्योति और भी बहुत सारे नाम हैं जो पूरे भरता के साथ पाकिस्तान और अफगानिस्तान को भी हिंदू बनाकर ही छोड़ेंगे… चलिए कहने में क्या हर्ज है. पर यही कारण है कि राज्य सभा में प्रधान मंत्री के सामने विपक्ष का हंगामा चलता रहा और प्रधान मंत्री खामोश बैठे रहे… विकास का नारा और वादा कहाँ चला गया … अभी कुछ दिन और बीतने दीजिये मोदी जी के अपने ही इनकी जड़ खोदने में लगे हुए हैं…. पर हर हाल में नुक्सान तो आम आदमी का ही होता है न!

    yatindranathchaturvedi के द्वारा
    December 21, 2014

    आभार आदरणीय जवाहर लाल जी,आपकी शुभकामनाएं हम सहेज रहें है। हम तो कलम के मुसाफिर हैं, रास्ते कहीं से चले पर पहुंचेंगे समाज के पोषण पर ही। कलम धर्म हमने तो निभाया है, आप भी कलम के उपासक हैं. कलमों ने हमेशा राष्ट्र को सहेज है धर्म को उंकेरा है।_ कलमें हमारी धरोहर हैं.सादर

PAPI HARISHCHANDRA के द्वारा
December 20, 2014

यतीन्द्रनाथ जी बधाई बहुत उत्तेजक भावनात्मक भाषण जो लेखक ने लिखा किन्तु किसी राजनेता ने नहीं बोला जब देश आजाद हुआ तब राम नाम जपने वालों को राजनीती ने ही पैदा   किया गांधी जी भी हे राम का गुरु मन्त्र दे गए राम का नाम जपते जनसंघ कुछ न कर पाई किन्तु भारतीय जनता पार्टी का लोक परलोक सुधर गया तभी तो कहा जाता है राम नाम सत्य है ओम शांति शांति

    yatindranathchaturvedi के द्वारा
    December 21, 2014

    आभार आदरणीय PAPI HARISHCHANDRA जी, आपकी शुभकामनाएं हम सहेज रहें है। हमने तो कलम धर्म निभाया है, आप भी कलम के उपासक हैं. कलमों ने हमेशा राष्ट्र को सहेज है धर्म को उंकेरा है।_ कलमें हमारी धरोहर हैं.सादर

Shobha के द्वारा
November 23, 2014

श्री पाण्डेय जी धर्म की राजनीति करने वालों के खिलाफ बहुत अच्छा लेख लेख का अंतिम पूरा पैरा ग्राफ ग्राफ बहुत अच्छा लिखा है बहुत सुंदर तुलनात्मक अध्ययन लेख बहुत अच्छा है डॉ शोभा

    yatindranathchaturvedi के द्वारा
    December 21, 2014

    आभार आदरणीय Shobha जी, आपकी शुभकामनाएं हमारी धरोहर हैं. हमने तो कलम धर्म निभाया है, आप भी कलम के उपासक हैं. कलमों ने हमेशा राष्ट्र को सहेज है धर्म को उंकेरा है।


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