कलम-पथ

शब्द जिन्दगी के_____यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी

196 Posts

1093 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 12689 postid : 816443

भारतीय राजनीति के मिरेकल : संजय गांधी

  • SocialTwist Tell-a-Friend

15_YATINDRA jpeg[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]_आजाद भारत के इतिहास में संजय गांधी इकलौते ऐसे राजनेता हैं, जिनके व्यक्तित्व और क्रियाकलापों के बारे में जानने की जिज्ञासा भारतीय जनमानस में अब भी है। उनके बारे में सबसे ज्यादा किवदंतियां सुनी जाती रही हैं। भारतीय राजनीति में संजय गाँधी का नाम एक ऐसे युवा नेता के रूप में दर्ज है जिसकी वजह से देश की राजनीति में कई बड़े परिवर्तन हुए। अपनी तेज तर्रार शैली और दृढ निश्चयी सोच की वजह से देश की युवा की पसंद बने इस नेता के फैसलों के आगे कई बार तात्कालिक प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को भी पीछे हटने को मजबूर कर दिया। आलोचकों के निशाने पर रहने के बावजूद उनके कई फैसलों को आज तक सराहा जाता है। देश की सबसे प्रभावी व्यक्तित्व वाली प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी और स्वर्गीय फिरोज गाँधी के पुत्र संजय गाँधी को एक ऐसे व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता है जिसने भारत के लोकतंत्र को अधिनायकत्व में बदल दिया था।

14 दिसंबर 1946 को जन्मे संजय गाँधी ने 70 के दशक की भारतीय राजनीति में कई उदाहरण पेश किये जिसे आज तक याद किया जाता है। भारतीय राजनीति में तेज़ी से उभरे संजय गाँधी 23 जून 1980 को एक हवाई दुर्घटना शिकार हो गए।

संजय गांधी को ईश्वर ने बहुत छोटी सी उम्र दी, लेकिन उस छोटी उम्र में ही संजय गाँधी ने देश को हिलाकर रख दिया था। महज 33 साल की उम्र में ही संजय गांधी सत्ता और सियासत की वो धूरी बन गये थे, जहां कहते हैं कि कैबिनेट भी बौना पड़ जाता था. संजय गांधी इंदिरा गांधी के लिए मजबूती बनकर उभरे तो साथ ही मजबूरी भी। संजय गांधी की किसी भी कीमत पर अपनी मन की करने, किसी भी कीमत पर अपनी चाहत को हासिल करने की, उस हासिल करने के बीच में रोड़े अटकाने वाले को हाशिए पर पहुंचा देने की महारत हासिल थी। संजय गांधी की बचपन से मशीनों और उपकरणों में ख़ास रुचि थी जिसे देखकर नेहरू जी कहा करते थे कि उनका नाती एक बेहतरीन इंजीनियर बनेगा। हर काम को अपने अंदाज में करने के आदी संजय गाँधी ने व्यक्तिगत जीवन के साथ साथ देश का भविष्य तय करने वाले कुछ ऐसे फैसले लिए जिनकी वजह से लोकतंत्र को विषम परिस्थितियों से गुजरना पड़ा। राजनैतिक विशेषज्ञों/ समकालीनों के अनुसार तो 1975 की इमरजेंसी में संजय गाँधी ही ऐसी ताकत साबित हुए थे जिसने राष्ट्रीय कांग्रेस के अस्तित्व को पुनर्स्थापित करने की हिम्मत दिखाई थी| 19 माह के आपातकाल से उभरने के बाद वर्ष 1977 के चुनाव में भले ही कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उसके बाद संजय गाँधी और श्रीमती इंदिरा गाँधी को गिरफ्तार कर जेल भेजने की तैयारियां भी की गई। हालाँकि तात्कालिक सरकार ज्यादा दिनों तक सत्ता में नहीं रह सकी और वर्ष 1979 के चुनाव में कांग्रेस को प्रचंड जनादेश ने सत्ता में वापस किया। कहा जाता है कि एक समय ऐसा था जब संजय गाँधी अपनी मां इंदिरा गाँधी के सामानांतर अपनी सरकार चलाया करते थे। संजय गाँधी ने कांग्रेस के कुछ नेताओं और अधिकारियों की दम पर देश की आर्थिक नीतियों और प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के फैसलों को प्रभावित करना शुरू कर दिया था।’

सबसे हैरानी की बात ये है कि संजय गाँधी के जीवित रहते हुए जिन राजनैतिक दलों से उनका वैचारिक मतभेद था आज वही दल कांग्रेस की आलोचना करने के लिए संजय गाँधी के फैसलों का उदाहरण पेश करते हैं।_[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]



Tags:     

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (24 votes, average: 4.83 out of 5)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran