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शब्द जिन्दगी के_____यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी

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'गोडसे' ‘असंसदीय’-'प्रतिबंधित’ शब्द

Posted On: 24 Dec, 2014 social issues में

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15_YATINDRA jpeg[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]_भाजपा की अब तक की सबसे बड़ी उपस्थिति वाली, बहुमत की संसद द्वारा, संसद की नियम पुस्तिका में एक नया नियम जोड़कर ‘गोडसे’ शब्द को असंसदीय मानकर, बैन लगाया गया है। यह गोडसे भक्तों को भारतीय संसद का इस्पाती जवाब है। ‘गोडसे’ शब्द – रावण, हिटलर, मुसोलनी,बुरा,धोखेबाज, कुतर्क, झूठा, झूठ, षड़यंत्र, मानसिक, विदेशी धन, शर्म, रंग बदलना,जोकर,मजाक, मजाकिया,दांत निकालना (मंद मंद हंसना), जैसे असंसदीय शब्दों के कारागार में डाल दिया गया।

पवित्र भारतीय संविधान किसी धर्म की निजी जायजाद नहीं है। हिन्दू-मुस्लिम-सिक्ख-ईसाई- जैन-बौद्ध एवं हजार से अधिक जातियों का, भाषाओं का, मानसिक व्यक्तित्व और राष्ट्रीय समन्वय की वेद और उपनिषद से चली आती कालजई पवित्र अदम्य लालसाओं की मशाल है हमारा संविधान। राम-मंदिर विवाद में हिन्दू कर्णधार, सुप्रीम कोर्ट जो फैसला कह देगी मान्य है ऐसा कहते रहते हैं। गोडसे केस में गोडसे के किसी भी दलील को सुप्रीम कोर्ट ने न्याय संगत नहीं माना, फलस्वरूप मृत्यु दंड की सजा तामील हुवी। आज न तो गोडसे जिन्दा है और न भारतीय संविधान के माननीय न्यायाधीश। शाहबानो केस में शाहबानो को न्यायालय के बाहर सुलहनामें के आधार पर न तो संविधान का उलंघन था और न तो सुप्रीम कोर्ट की न्याय व्यवस्था का। अतः गोडसे का केस, शाहबानो केस से हर मायने में अलग है। अब इस प्रकार गोडसे का वर्तमान महिमा मंडन संविधान पीठ की ही अवमानना नहीं, सुप्रीम कोर्ट द्वारा मृत्युदंड के फैसले की अवहेलना है, जहाँ एक ओर न्यायलय की अवमानना की परिधि में है वहीं दूसरी ओर जब चाहे सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ठुकरा दे! क्या यह न्यायपालिका के संविधान पीठ की नीँव हिला देना नहीं है?

इतिहास को कैसे झुठला सकते हैं ! प्राचीन 16 महा-जनपदों का संयुक्त मानचित्र वर्तमान गणतांत्रिक भारत है! 16 महा-जनपदों का राज्य भारत जिसके सभी राजा हिन्दू थे! हर्षवर्धन का शासन काल 606 से 648, वह उत्तर भारत तक ही सीमित था! कावेरी से आगे दक्षिण भारत तक नहीं था! दक्षिण के वाकाटक, चोल, पांड्य, राज्य रहे हों अथवा विजय नगर का हरहर और वुक्का के नेतृत्व का राज्य रहा हो, या उत्तर पथ के राज्य रहे हों! सुंग अथवा कण्व के ब्राह्मण राज्य रहे हों अथवा दक्षिण और पश्चिम भारत के पल्लव एवं सातवाहन राज्य रहे हों अथवा गुप्त साम्राज्य के राजा रहे हों सब अलग-अलग हिन्दू राजा थे! पर वर्तमान संघीय गणतांत्रिक भारत का कोई एक हिन्दू राजा नहीं था। दूसरे शब्दों में वर्तमान संघीय गणतांत्रिक भारत का कोई एक हिन्दू राजा नहीं था। एकछत्र राजा कोई नहीं था वर्तमान गणतांत्रिक वृहत्तर मानचित्र की सीमाओं का, लेकिन सभी हिन्दू राजा वेद, उपनिषदों, गृह सूत्र, मनु स्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति द्वारा स्थापित विधि-शासन-प्रशासन-सामाजिक संरचना और सांस्कृतिक छत के नीचे सांस्कृतिक धरातल पर विवाह,उत्तराधिकार आदि पर एक सांस्कृतिक, चिकित्साशाष्त्रीय और साहित्यिक शासन था। साहित्य और संस्कृति का डंका समूचे देश में एकछत्र बजता था,वह भी हिन्दू के नाम पर नहीं, वेद उपनिषद के नाम पर सभी 16 संस्कारों पर इनका डंका बजता था।

इस प्रकार 800 साल पहले वर्तमान गणतांत्रिक देश में सम्पूर्ण मानचित्र पर हिन्दू शासन था, एक छत्र हिन्दू राज्य था यह कहना हिंदुत्व को अति संकुचित सीमा में खड़ा करना हुवा । हिंदुत्व को वेद-उपनिषद, गृह-सूक्त, स्मृतियाँ द्वारा स्थापित विधि-व्यवस्था,शासन-प्रशासन के विरुद्ध खड़ा करना हुवा, जो भारत माता के शाश्वत मातृत्व को अपमानित करना हुवा। यही नहीं आज की तलवारें इन्द्रप्रस्थ से लेकर तक्षशिला तक भारत को विभाजित करा दी है। हिन्दुस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश तीनों एक अलग-अलग देश है,फिर भी तीनों एक ही लोकतांत्रिक छत्रछाया का देश है। भारत के अबतक 14 प्रधानमंत्री जिसमें सर्वश्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, गुलजारी लाल नंदा ,लाल बहादुर शास्त्री, श्रीमती इंदिरा गांधी, मोरारजी देसाई, चरण सिंह, राजीव गांधी , विश्वनाथ प्रताप सिंह, चन्द्र शेखर , पी.वी.नरसिंह राव , अटल बिहारी वाजपेयी, एच.डी.देवेगौड़ा, इंदर कुमार गुजराल, डॉ.मनमोहन सिंह अपने-अपने जनादेश पर हुवे! क्या हिन्दू नहीं थे यह सभी? इनका पुश्तैनी धर्म हिन्दू नहीं था? अकेले अशोक सिंघल ही एक मात्र हिन्दू अवशेष हैं! क्या हिन्दूवाद के गलियारे से राष्ट्रधर्म के विरुद्ध बगावत नहीं हो रहा। बात व्यक्ति से ऊपर अब संविधान को छू रही है।_[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]



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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshagarwal के द्वारा
January 4, 2015

                          जय श्रीं राम  क्या ये शर्म की बात नहीं की जिन आक्रमंकारियो ने लाखो हिन्दुओ का कतल कर दिया क्योंकि उन्होंने ओस्लम कबूल करने से इनकार कर दिया और जिन्होंने हमारे हजारो मंदिरों को नष्ट कर दिया और उन अंग्रेजो ने जिन्होंने हमारी सम्पदा को लूटा, संस्कृति,अतीत, धर्म ,शिक्षा पद्धति और देश को नास्ता कर दिया और मानसिक गुलाम बना कर देश का बटवारा किया उनके नाम पर अब भी सड़के,स्मारक और इमारते है नेहरूजी ने नोबल शांति प्राइज लेने के चक्कर में सेकुलरिज्म के नाम पर मुसलमानों को खुश करने के लिए स्वाभीमान को बेच दिया.क्यों आज़ादी के बाद उन मस्जिदों की हम गिरा सके.

dhirchauhan72 के द्वारा
December 27, 2014

बेटा……कटुवों के चक्कर में फंसे नहीं हो …! कितना अच्छा लगता है जब आज हिन्दू एक है जाति वर्ग में बटा हुआ नहीं है ……बस ५० साल कांग्रेसी कटुवों से देश को दूर रख लिया जाए तो सारा देश सुखी और समृद्ध होगा वैसे में कटुवा को जगह शब्द इस्तेमाल नहीं करना चाह रहा था …..लेकिन कांग्रेस को गाली देने के लिए शब्द नहीं मिलते पहले में कुत्ता कहता था लेकिन जबसे पाला है लगता है कुत्ते बहुत समझदार प्राणी हैं !

    yatindranathchaturvedi के द्वारा
    December 27, 2014

    dhirchauhan72 तुम्हारे बजबजाते ज्ञान पर तरस आता है। और लगता है नफ़रत की चौहद्दी में परवरिश हुवी है तुम्हारी। यह विचारों का मंच है, आलोचना की जा सकती है, पर इंसानी बौद्धिक मर्यादा में, ‘कुकुर झौं-झौं’ का यह मंच नहीं।


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