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शब्द जिन्दगी के_____यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी

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आत्ममंथन-भारतरत्‍न

Posted On: 27 Dec, 2014 social issues में

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15_YATINDRA jpeg[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]_’सर्वविद्या’ के ‘महामना’ भी आज ‘भारत के रत्न’ हो गए।_’मधुर मनोहर अतीव सुन्दर’। आदरणीय अटल बिहारी बाजपेयी को ‘भारतरत्न’ मिलने से आज भारत माता खुश होंगी।_जिंदगी के शोर भरे शब्द-शब्द मंथन के एकाकी अक्षर भारतीय राजनीती के धरोहर हैं-’क्या खोया, क्या पाया जग में, मिलते और बिछुड़ते पग में, मुझे किसी से नहीं शिकायत,
यद्यपि छला गया पग-पग में, एक दृष्टि बीती पर डालें, यादों की पोटली टटोलें!’

भारतरत्न एक ऐसी उपाधि है, जो किसी व्यक्ति द्वारा किसी क्षेत्र के विकास में उसके विशेष योगदान के लिए दिया जाता है। भारतरत्न केवल एक सम्मान नहीं, मिलने वाले के लिए उसकी जीवन-भर की उपलब्धि होती है। कुल एक सौ पचीस करोड़ में से डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन से लेकर महामना पंडित मदन मोहन मालवीय तक भारतरत्न 45 अबतक हैं।

सम्मान पर कभी राजनीति नहीं होनी होता। देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान के मुद्दे को सियासी अखाड़े में नहीं घसीटा जाना चाहिए। इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान के लिए हर उनका पहला हक बनता है, जिन्होंने मुल्क को एक पहचान दिलाई है। कई छूट गए कई प्रतीक्षित आगे हैं। हर समूह, हर राजनीतिक दल, हर समुदाय को अपने हिस्से का अपना एक-एक भारतरत्न चाहिए। सभी अपने-अपने अगुवा का नाम लिए घूम रहे हैं। प्रथम आदमी से लेकर अंतिम आदमी तक के, इस आत्म-मंथन में सभी के हिस्से का भारतरत्न छूट रहा है। इसे दिया तो गलत, उसे नहीं दिया तो गलत। गलत और फिर एक गलत। सही और गलत के इस मुहाठोठी में सम्मान भी हतप्रभ है। भारतरत्न की इस किचकिच में कोई अटल बिहारी वाजपेयी, तो कोई कर्पूरी ठाकुर और कोइ राममनोहर लोहिया के नाम को आगे किये हुवे है। जिसतरह भारतरत्न की मांग हो रही है, उससे तो लगता है कि भारतरत्न देने की परंपरा को ही समाप्त कर देना चाहिए।

कुछ लोग सम्मानों से ऊपर होते हैं। भारतरत्न के सम्मान का पात्र केवल कला, साहित्य, विज्ञान और समाजसेवा से ही जुड़े रत्न [व्यक्तियों] को माना जाता था, जिसे संशोधन करके 2011 में फेर-बदल किया गया, जिसको थोडा और विस्तार दिया जा सकता है। किसी भी पुरस्कार के संदर्भ में सम्पूर्ण वस्तुनिष्ठता संभव नहीं होती–कहीं न कहीं तो चयन प्रक्रिया में मानव विवेक अपनी भूमिका अदा करता ही है। भारतरत्न को एक बुनियादी आत्म-मंथन की जरूरत है, जिससे इस सम्मान की गरिमा और सम्प्रभुता कायम रहे। भारतरत्न देने के लिए एक सर्च कमेटी का गठन होना चाहिए और यह कमेटी पूरी तरह से बहुमत बटोरकर आत्ममंथन करे, फिर समिति का मुखिया अथवा प्रवक्ता एक बार सार्वजनिक तौर पर उन नामों के पक्ष में तर्क दें, जिन्हें वे भारतरत्न देना चाहते है, पक्ष-विपक्ष अलंकरण के पहले हो जाये और फिर 26 जनवरी को यह अलंकरण भारत के राष्ट्रपति द्वारा प्रदान कर दिया जाय।

भारतरत्न कई को नहीं मिला है अबतक। अब बात चली है तो कुछ नाम छूट चुके है, जिनपर विचार होना चाहिए, भारतरत्न इनको भी मिलना चाहिए—चन्द्रशेखर आजाद, सरदार भगत सिंह, स्वामी करपात्री जी महाराज, महामना पंडित मदन मोहन मालवीय, बाल गंगाधर तिलक, चंडिकादास अमृतराव देशमुख ‘नाना जी’, गुरुदेव रविन्द्र नाथ टैगोर, बंकिमचन्द्र, मुंशी प्रेमचंद, आचार्य राम चन्द्र शुक्ल, हजारी प्रसाद द्विवेदी, महादेवी वर्मा, रामधारी सिंह दिनकर, सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन “अज्ञेय”, शरतचंद, सुकांतो भट्टाचार्य, मेजर ध्यानचंद, पंडित कमलापति त्रिपाठी, माता आनंदमयी, जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती, परमपावन दलाई लामा, तरुण सागर जी, राष्ट्रसंत मुरारी बापू, श्रीश्री रविशंकर जी महाराज, डॉ.वर्गीज कुरियन, आदि आदि।_[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]



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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

dhirchauhan72 के द्वारा
December 28, 2014

जिस ज्ञान की आप बात कर रहे हैं उसे ज्ञान नहीं चमचा गिरी कहते हैं ! आज तक जितने भारत रतन हैं ये सब फर्जी हैं भारत रतन तो अब प्रधानमंत्री बना है …….देखते जाओ बहुत मजा आने वाला है ! 2019 में बीजेपी को 450 सीट मिलेंगी और सभी राज्यों में बीजेपी की सरकार होगी ! और एक बात बताऊँ ये धर्म परिवर्तन और गोडसे को पूजने वाले कोंग्रेसी चमचे हैं …….वो कौन सरस्वती है जिसे आप भारत रतन दिलवा रहे हैं वो कोंग्रेसी चेला है सब जानते हैं !

    yatindranathchaturvedi के द्वारा
    December 28, 2014

    dhirchauhan72,आपकी भाषा में शब्द से अधिक शब्द-दारिद्र्य की ईर्ष्या है, जिस ज्ञान को आप चमचागिरी कहते हो, वह सतही और कुन्दबुध्दि से परे है। और एक बात कोई भारतरत्न फर्जी नहीं, पर तुम जरूर फर्जी हो, और ऐसा कहकर भारत द्रोही भी। अभी लिखना शुरू किये हो बच्चा, थोड़ा पढ़ लिख लो फिर आना। छमता भर शास्त्रार्थ करना।


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