कलम-पथ

शब्द जिन्दगी के_____यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी

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सरहद पर अब श्वेत कबूतर नहीं, बाज़ उड़ाने की जरूरत है

Posted On: 28 Jul, 2015 social issues में

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15_YATINDRA jpeg[यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]_भारत तो बुद्ध का देश है। गांधी की अहिंसा यहाँ की धमनियों में बहती है! पर इसका मतलब यह नहीं कि सदियों पुरानी भारत की वैश्विक शांति में कोई खलल डाले। भारत के चप्पे-चप्पे पर वीर बसते है। हर धड़कन में मंगल पाण्डेय और राणा प्रताप की आत्मा हिलोर लेती है।नापाक हिंसा की लहू के विशाल लेखे-जोखे में इंसानी जज्बातों की धड़कने छूट रही है! खुद आतंक की बैसाखी पर खड़ा पाकिस्तान भारत की सीमा रेखा पार कर भारतीय योद्धाओं को छल से मारकर भारत की गहरी शांति को झकझोर रहा है! आज शर्मिंदा है- इंसानी धर्म! पड़ोस धर्म! सैनिक धर्म! राष्ट्रीय धर्म! वैश्विक धर्म! भारत के बढ़ते वैश्विक संप्रभुता से सहमा पाकिस्तान अब कायर हिंसा की राह आ रहा है। आतंक के पोषक रंगहीन-धर्महीन, रक्त के द्रोही होते हैं। न्याय-प्रणाली में सारी दलीलों के बाद ‘सजा-ए-मौत’ पर काना-फूँसी राष्ट्र के ‘मान’ की ‘हानि’ है। आतंकवाद आधी शताब्दी से हमारी बुनियाद पर पसरा हुवा है। लाखों जिंदगियाँ पीड़ित हैं आतंक की विभिन्न विसंगतियों भरे दहशत से। आतंकवाद की भयावता से पूरा विश्व पीड़ित है। सवा सौ करोड़ भारतीयों के देश की सुरक्षा पर जोखिम बढ़ा हुवा है। वाचाल सरहदों पर भारतीय राजनीतिक त्रासदी अपने चरम पर है। राष्ट्रीयता के संघर्षों का भविष्य पृथक-पृथक धीरे-धीरे धूमिल होता जा रहा है। आतंकियों से जूझते-जूझते हमारे हजारों जवान शहीद होते गए । हजारों आम नागरिक मार दिए गए! कितनी जानें गयीं ! कितनी माँओं की कोख उजड़ गयी! कितनी महिलाएं विधवा हो गईं ! कितने बच्चे अनाथ हो गए ! कितने घर बर्बाद हुए! किसी से छुपा नहीं है ! फिर भी दहशत के शिकार समुदाय की अनदेखी कर दहशतगर्दों के पक्ष में दलीलें लिए घुमते हैं लोग। सरहद पार से अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन चिंता का विषय है। पाक के नापाक पथ से आतंकवाद पसर चुका है। एक ओर सीमा पार का प्रायोजित आतंकवाद है तो दूसरी ओर तथाकथित माओवाद और नक्सलवाद की विचारधारा से पोषित एवं प्रेरित आतंरिक आतंकवाद। [यतीन्द्र नाथ चतुर्वेदी]

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1 प्रतिक्रिया

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Shobha के द्वारा
July 28, 2015

श्री यतीन्द्र जी ठीक लिखा है आपने बहुत कोर्निश बजा ली


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